Poetry

पुरउम्मीद

ग़र्चे   इस  दौर  से  भी  हँस  के  गुज़र  जायेंगे खाई  है  चोट, मगर  ठहरो,  सम्भल  जायेंगे आग  दिल  में रहे  और आँख  से पानी ना बहे हम  समंदर  हैं  समंदर  ही  नज़र  आयेंगे तुम तो इक ख्वाब हो, ताबीर हम समझ बैठे होते  हैं  हादसे,  इनसे  भी  उबर  जायेंगे तिश्नगी  […]

December 13, 2015 · 0 comments · Poetry

इक रुबाब सा

जो  ख्वाब  मुझे  तूने  दिया  है  सराब सा कैसे  बताऊँ  उसमें   नशा  है   शराब  सा चेहरे  की  बेरुखी  नज़रअंदाज़   के  देख आँखों में चमकता है जो, कुछ है, हिजाब सा मत  देख  मेरे  रुख  पे  ये  निशान उम्र   के दिल  में  है अभी तक वो पुराना हिजाब  सा दरिया सी […]

December 6, 2015 · 0 comments · Poetry

The Dear Departed

A  Tribute to Our Dear Father on his Birthday 9th December. Stealthily, he grew old Everyone does. But he was … our papa! Always going in and out, Always working Always guiding When did he grow old? When did Time fly away? Finally one day He lay shattered. Unable to […]

December 6, 2015 · 1 comment · Poetry

Idle Hours

The lonesome hours                                                          Clung on the hanging clock                                                 / Pinned to the wall Creeps silently with curious gaze At the inmates glued […]

November 29, 2015 · 0 comments · Poetry

परी हूँ मैं

भटक  रही  हूँ  सदियों  से प्यार  के  सहरा  में रोक  के  उम्र – ए – रवाँ  को हरी भरी  हूँ मैं परी  हूँ  मैं तुम  तो  हर  बार  नया जन्म  ले के  आते  हो लेकिन  वो  कल  और  आज  की कड़ी  हूँ  मैं परी  हूँ  मैं वक़्त  छू  कर गुज़र […]

November 29, 2015 · 0 comments · Poetry

सफ़र

हमेशा दूसरों की नज़रो से देखा किये खुद को कभी अपने लिए जीने की कोशिश भी ना कर पाये ये कितनी मीलों लम्बा रास्ता तय कर लिया हमने  रहे बस कारवाँ  के  साथ, खुद से मिल भी ना पाये महज़ चलना ही मक़सद था कोई मंज़िल नहीं ढूंढी सफ़र की […]

November 22, 2015 · 0 comments · Poetry

The Slum

No need for fantasy, concepts or possessions No ugly scenarios, nice gestures or bad investments No right ifs, wrong not’s or in between Here in the slum, it’s all a quest to live thru the day No false hopes, faiths or despair No hard feelings, emotions or passions No pun […]

November 15, 2015 · 0 comments · Poetry

टूटे सपने

अपनी खता नहीं कि हम मंज़िल से दूर हैं कुछ फ़र्ज़, कुछ लिहाज़ से ही मात खा गए लम्हें  में सभी  दोस्तों के रुख़ बदल  गए जीती  हुई  वो  बाज़ी, हम  हार  जो  गए अब  धूप  ढल  गयी  औ’  अँधेरे  हैं सामने धुंधली सी रौशनी है कि  जलते हैं कुछ […]

November 15, 2015 · 0 comments · Poetry

The Algorithm of a Prayer

In a cathedral full of floating litanies. You halt You catch a prayer, Plant it In coals of fire, Like a seed, Expecting fruits of incense Time breaks your supplication Into fractions of approvals. A colorless light; A prism dispersing spectrum of aqua; A photosynthesis of blessings       […]

November 8, 2015 · 0 comments · Poetry

कोई वीरानी सी वीरानी है

सामने  दश्त  है, ग़ुबार  है, वीरानी  है मुड़ के देखूं तो आँखों में सिर्फ़ पानी है खो गए वक़्त की परतों में सुनहरे लम्हे अब तो तारीकियों में घिर रही कहानी है कोई उम्मीद,कुछ सूरत नज़र नहीं आती दास्ताँ  ज़िंदगी  की  मौत  की ज़ुबानी  है तेरा मिलना तो यक़ीनन ही […]

November 8, 2015 · 0 comments · Poetry