Poetry

इम्कान

वो तो ऐसा न था,वो बदल  सा गया मेरी क़िस्मत को किसकी नज़र लग जयी मैंने खुशियाँ सभी से छुपा रखी थीं ग़म के लश्कर को कैसे खबर लग गयी हम संभाले रहे दिल को हर गाम पर चोट  गहरी ये  देखो, मगर, लग  गयी आओ देखें  धुआँ सा कहाँ […]

December 28, 2014 · 0 comments · Poetry

Sorrow Of the Soul

Screaming innocence,  Weeping motherhood Barking barbarians,  Dying humanity Oh Lord! Break your silence Demolish the pyramid of blind faith Destruct the world with gigantic waves Let the sun rays never touch on the earth Moonlit night,  dazzling stars Roaring waves, blasting sound Pale eyes, Colorless dreams Oh Lord! Let’s finish […]

December 28, 2014 · 1 comment · Poetry

उदास  मंज़र

दूर तक उड़ती हुई धूल नज़र आती है क्या कोई कारवां गुज़रा मेरे वीराने से पी के कुछ और न बढ़ जाये  तिश्नगी दिल की अश्क़ छलके  मेरी तक़दीर के पैमाने से अजनबी भीड़ ने बरसाए जब पत्थर मुझ पर मुझको चेहरे नज़र आये हैं कुछ पहचाने से हमने घबरा […]

December 21, 2014 · 2 comments · Poetry

The Silent Killer

Sometimes Love kills Oh, sure it does Just like  Snipers The hidden foes With hatred One could cope By restraining The hope But Love! An unrequited Love! With  invisible  fire And Burning desire, Mars  the  will (to live) And Goes out and out To kill.           […]

December 14, 2014 · 0 comments · Poetry

सबा

आज भी तेरी महक़ ले के चली आती  है कभी खिड़की, कभी दरवाज़ा खटखटाती है कभी तेज़ी से गुज़रती है बजाती सीटी मेरी दुश्मन है सबा, किस क़दर सताती है मैं तुझे भूलना चाहूँ भी तो ना भूल सकूँ तेरे घर से तेरा अहसास लिए आती है तूने जो गीत […]

December 7, 2014 · 0 comments · Poetry

एक ज्वलंत प्रश्न

राम ! जब तुम्हें निर्दोष होते हुए भी बनवास मिला था तब तमाम सुख -ऐश्वर्य को छोड़ कर मै वन गई थी तुम्हारे साथ  !  आज राजा राम ने मुझे पूरी तरह निर्दोष जानते हुए भी पुष्प सा पवित्र मानते हुए भी बनवास दिया  है राजाज्ञा शिरोधार्य  ! परन्तु मै […]

November 30, 2014 · 0 comments · Poetry

सीता उवाच – 2

लक्ष्मण ! मैने राम को प्रथम-दृष्टि प्रेम से ही तो नही चुना था , शिव का धनुष-भंग करवा कर उनके बल की परीक्षा भी ली थी उनका पूरा परिचय लिया था तत्पश्चात एक सुयोग्य राजकन्या ने एक शूरवीर राजकुमार से यथाविधि परिणय किया था फिर ,भूल कहाँ हो गयी ? […]

November 23, 2014 · 0 comments · Poetry

A New Idea and The Watchman

To come to light, a newly conceived ideal idea seems to be scared and hesitated, its unabated peeping from the womb to light for watching a through pass, leading to a benevolent home- wherein a hidden reformer waits to welcome and use it in blooming the smiles in the gloomy […]

November 23, 2014 · 0 comments · Poetry

सीता उवाच

राम ! मैंने तुम्हारे साथ वनवास भोगा ,राज्य नही वह मेरा चुनाव था मै अशोक – वाटिका में रही पर्णकुटी में नही वह मेरी नियति थी किन्तु अग्निपरीक्षा देकर भी जो आज मुझे वनवास मिला है वह ना तो मेरा चुनाव है ना ही मेरी नियति वह मेरी सज़ा है […]

November 16, 2014 · 0 comments · Poetry

A Very Dark Day!

A Very Dark Day. A sunny day it was, bright & beautiful All seemed to be happy It was a clear blue sky The sun seemed to be smiling It was a very infectious smile All of us were soon in its clutches No one could even dream of A […]

November 16, 2014 · 2 comments · Poetry