Poetry

बदगुमानी

लोग कहते रहें, कहने को कि, ख़ुदा है इश्क़ दरअसल सोचिये तो सिर्फ हादिसा है इश्क़ ज़िंदगी रास्ता है और मौत मंज़िल है इनसे बच कर निकल गया वो कारवां है इश्क़ किस ख़ुशी, कौन से से सुकूँ का ज़िक्र है यारब मेरे ख़याल में इक दर्दे- जाविदां है इश्क़ ये […]

September 21, 2014 · 0 comments · Poetry

तरदीद

मुझको भी तुमसे मुहब्बत तो नही हमदम ,कि बस दिल  पे  तेरी  बेरुख़ी  कुछ  चोट सी  पहुँचाये   है  तुम अगर  मसरुफ़ हो तो हम भी कब हैं मुंतज़िर  फिर भी हर आहट  पे इक उम्मीद सी बँध जाये है  तुमने की तर्के-वफ़ा ,अच्छा हुआ ,झंझट ख़तम  बस यही अफ़सोस […]

September 14, 2014 · 0 comments · Poetry

जय हिंद! जय हिंद! जय हिंद!

जय हिंद! जय हिंद! जय हिंद! जय हिंद के ये नारे, लगते हैं कितने प्यारे. यह हिंद का हित हृदय में लेकर बढे़ चलो,बढे़ चलो,तुम आज के नौ जवानो. रखशा करो जी-जान से इसकी. अत्याचार और भृष्टाचार से लड़ो जो इस देश को खोखला कर रहे हैं. उतार दो नकाब […]

September 7, 2014 · 2 comments · Poetry

यास

सबको है तुझसे शिकायत बेवफाई की मगर हमको तेरी चार दिन की दोस्ती ही का गिला है ख़ुद  बढ़ा कर हाथ तुम, ख़ुद ही पलट कर चल दिए इस तरह तर्के-तमन्ना किन वफ़ाओं का सिला है दिल  को तुमने शौक़, हसरत, आरज़ू, सबकुछ दिया बात किस्मत की भी है, बस […]

September 7, 2014 · 0 comments · Poetry

The Stars And You

Look, that’s the Pole Star, That which gleams with all its might. And  that over there is Venus, Shimmering as it were a star, Wanting to be part of all this colour.   Join the tiny white dots And there stands a big sheep. Oh, and there peeps the lion, […]

August 31, 2014 · 0 comments · Poetry

एक वीरानी सी वीरानी है

 इस अँधेरे बंद घर में जी नही लगता मेरा अब क़फ़स की बंदिशों में जी नही लगता मेरा क्यों मिला हम को मिला मकाँ वीराने में यारब बता चीखती इस ख़ामुशी में जी नही लगता मेरा ना कोई मंज़िल नारा हें और न कोई हसरतें बेसबब इस ज़िंदगी में जी […]

August 31, 2014 · 0 comments · Poetry

Our Truth

It’s the wicked world we live in Obscured by different values we do or do not believe in. Sacrifices, patience, benevolence are just mere words Greed, avarice, cruelty rules the crust like lords of swords. Searching true selves amidst these is like passing through labyrinth That may cause confusion and […]

August 31, 2014 · 0 comments · Poetry

The Light of Solace

A dried maize cob she looked  Standing silently in the midst of green  All wrapped up in a brownish shawl.  Sadly she smiled to herself  At the thoughts of her loved one.  Yes, the loved one who shunned and  Drowned her in a sea of  Jeers, accusations, sarcasm  Yet she […]

August 31, 2014 · 3 comments · Poetry

क्या हम आज़ाद हैं …..?

अपने फ़र्ज़ से दूसरों के कर्ज़ से अपने अरमानों से दूसरों के एहसानों से क्या हम आज़ाद हैं ……? किसी के प्यार से किसी के मनुहार से किसी की नफ़रत से किसी की उल्फ़त से क्या हम आज़ाद हैं ……..? किसी के बंधन से किसी के अनमन से किसी के […]

August 24, 2014 · 0 comments · Poetry

The Rusty Sword

 As soon I ascended the chariot, I saw the dusty ways around, Enigmatic and confusing fields, Mawkish and haze in breath profound, All I had to beat the odds, My legendary shining silver sword, Waved in the dust and all clear I saw, To my ecstasy, I intensified in guffaw. […]

August 24, 2014 · 0 comments · Poetry