Poetry

The Nation’s Hero

The Nation’s Hero He rose from humble origin To become a rising star Studded with glorious achievements The race he won galore. His far sight reaches a zenith No one can deter his vision The long lost nation Looted and plundered Struggles to restore its balance His aim  to restore […]

October 5, 2014 · 1 comment · Poetry

Introducing My Country to a Tourist

Keen was he to see the map of my country and I handed him a peepul leaf. He looked astounded. I asked, ‘Does it not look like the heart?’ He wanted to know the boundaries of my country and I pointed toward the flying birds far-off. When asked about my […]

October 5, 2014 · 1 comment · Poetry

एक शै

है कोई शै, ख़ुशी  है नाम  उसका कौन है, किस जगह पे मिलती  है लोग  कहते  हैं  वो  कली  है जो मेरे  गुलशन  से  दूर  खिलती है तुम  न  आये  न  नींद  आती  है कोई आहट सी दिल को छलती है क्या  जुनूँ  है, मेरे  तसव्वुर  में तेरी  परछाईं  जैसे […]

October 5, 2014 · 0 comments · Poetry

From The Diary Of a Newly Turned Father

A round the clock tiny ‘Time Bomb’ keeps ticking by my side as I wait anxiously to see her explode. She is just a few days old; her impossibly small velvety hands, infirm slender legs with knees lacking in detail, tiny feet as if some artist’s chimera. And then her […]

September 28, 2014 · 2 comments · Poetry

हादसा

तुम्हे क्या बतायें  कि क्या हुआ मेरे  साथ  है  जो  सितम  हुआ दिल  तोड़  के वो  ये  कह  गये लो, ये क़िस्सए – दर्द क़लम हुआ हमें क्यों हो उससे  गिला कभी हमें आये  उसका  ख़याल क्यों हम  उसे  न  चाहेंगे  उम्र – भर जो वफ़ाओं से मेरी सहम गया […]

September 28, 2014 · 0 comments · Poetry

बदगुमानी

लोग कहते रहें, कहने को कि, ख़ुदा है इश्क़ दरअसल सोचिये तो सिर्फ हादिसा है इश्क़ ज़िंदगी रास्ता है और मौत मंज़िल है इनसे बच कर निकल गया वो कारवां है इश्क़ किस ख़ुशी, कौन से से सुकूँ का ज़िक्र है यारब मेरे ख़याल में इक दर्दे- जाविदां है इश्क़ ये […]

September 21, 2014 · 0 comments · Poetry

तरदीद

मुझको भी तुमसे मुहब्बत तो नही हमदम ,कि बस दिल  पे  तेरी  बेरुख़ी  कुछ  चोट सी  पहुँचाये   है  तुम अगर  मसरुफ़ हो तो हम भी कब हैं मुंतज़िर  फिर भी हर आहट  पे इक उम्मीद सी बँध जाये है  तुमने की तर्के-वफ़ा ,अच्छा हुआ ,झंझट ख़तम  बस यही अफ़सोस […]

September 14, 2014 · 0 comments · Poetry

जय हिंद! जय हिंद! जय हिंद!

जय हिंद! जय हिंद! जय हिंद! जय हिंद के ये नारे, लगते हैं कितने प्यारे. यह हिंद का हित हृदय में लेकर बढे़ चलो,बढे़ चलो,तुम आज के नौ जवानो. रखशा करो जी-जान से इसकी. अत्याचार और भृष्टाचार से लड़ो जो इस देश को खोखला कर रहे हैं. उतार दो नकाब […]

September 7, 2014 · 2 comments · Poetry

यास

सबको है तुझसे शिकायत बेवफाई की मगर हमको तेरी चार दिन की दोस्ती ही का गिला है ख़ुद  बढ़ा कर हाथ तुम, ख़ुद ही पलट कर चल दिए इस तरह तर्के-तमन्ना किन वफ़ाओं का सिला है दिल  को तुमने शौक़, हसरत, आरज़ू, सबकुछ दिया बात किस्मत की भी है, बस […]

September 7, 2014 · 0 comments · Poetry

The Stars And You

Look, that’s the Pole Star, That which gleams with all its might. And  that over there is Venus, Shimmering as it were a star, Wanting to be part of all this colour.   Join the tiny white dots And there stands a big sheep. Oh, and there peeps the lion, […]

August 31, 2014 · 0 comments · Poetry