Poetry

ख़ामोशी

दिल में जब कोई बात बहुत चुभती है

तो इंसान ख़ामोशी से बस

उसी में निरंतर जूझता रहता है

तब तक, जब तक

उस अनमनी सी बात का

कुछ हल ना निकले.

 

क्यूं इस कदर परेशान

फिरता है ये मन

अफसोस करता है

ना जाने कितने पल

क्या करें कैसे निकले

इसका हल.

 

जो बीत गई उस बात पर

बिन बात सोचने का कोई

फ़ायदा होता तो नहीं

फिर भी सोचना और जुझना

इंसान की फितरत में

शामिल है.

 

कुछ बातें समय के हवाले

बेफिक्र छोड़ देनी चाहिए

क्यूं कि समय से पहले और

किस्मत से ज्यादा किसी को न

मिलता है न मिला है.

 

जो सोचते हैं किस्मत उनकी मुट्ठी

की लकीरों में सिमटी हुई है

बेख़बर नादां हैं वो

जो खुद को ख़ुदा समझने

की भूल कर बैठे हैं.

 

खामोश रहने का मतलब

सिर्फ़ धीरज रखना नहीं होता

खामोश वो भी होता है

जिसके मन में हज़ारों

तूफ़ाँ समाए हों.

 

ना छेड़ो उस तूफान के

ठहरे उफान को

कस्तियां ही नहीं

बहुतों की ज़िन्दगी भी

डूबा सकतीं हैं.

 

                                                                           ~ Dr Shivangi Srivastava

                                                                     Motihari, India

One Comment

  1. Thanks for sharing this beautiful poem.

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