युद्ध का हथियार, हमारा पहला प्यार

युद्ध का हथियार, हमारा पहला प्यार

जैसे हम खाना खाते हैं, जैसे हम कपड़े पहनते हैं, जैसे हम स्कूल जाते हैं, हम एक और शूटिंग के बारे में सुनते हैं

पहले हम भगवान की पूजा करते थे, अब हम बंदूक की पूजा करते हैं

शायद इस देश की आत्मा बीमार पड़ गई, शायद इसकी भावना टूट गई

कितने और आशीर्वाद और प्रार्थना हमको करनी पड़ेंगी?

कितनी और मोमबत्तियां मृतकों के लिए हमको जलानी पड़ेंगी?

कितनी और बार हम हत्यारे के परेशान जीवन के बारे में पढ़ेंगे?

हमारे बच्चे अपने जीवन के लिए मार्च कर रहे हैं, जबकि हमारे राजनेता अपनी जेबें भर रहे हैं

उन्होंने प्रेम के ऊपर गोलियों को चुना है

 उन्होंने “ERA” के ऊपर “NRA” चुना है

क्या हमारे संस्थापक पिता यह चाहते थे?

की ये पवित्र बंदूकों को हमारे बच्चों से अथिक अथिकार होना चाहिए?

उन्होंने हमको बताया कि भगवान सभी इंसान को समान बनाया, लेकिन लगता है कि बंदूकें इंसान की तुलना में और समान बनाई गई हैं

इस पीढ़़ी के पास इस पागलपन को खत्म करने का काम है

और इस काम को जल्दी से ख़तम करना पड़ेगा

अन्यथा, हम जिसके लिए वे मोमबत्तियां जलाएंगे

युद्ध का हथियार, हमारा पहला प्यार

~*~

Weapons of war: our first and foremost love

Just as we eat food

Just as we wear clothes

Just as we go to school

We hear of one more shooting

First, we used to worship God

Now we worship guns

Perhaps the soul of this country has fallen ill

Perhaps its spirit has broken

How many more thoughts and prayers will we have to give?

How many more candles for the deceased will we have to light?

How many more times will we read of the shooter’s “troubled life”?

Our children are marching for their lives

While our politicians are lining their pockets

They have chosen bullets over love

They have chosen the NRA over the ERA

Is this what our founding fathers wanted?

That these sacred guns have more rights

Than our own children?

They told us that God made all men equal

But it seems that guns are more equal than humans

This generation has been tasked to end this madness

And we must finish this task now

Otherwise, it will be us

For whom they will be lighting the candles for

Weapons of war: our first and foremost love

                                                                                  ~ Aparna Priyadarshi

                                                                                  New York, USA

One Comment

  1. Awesome composition of very profound thoughts – bless you !!

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