Archive for July, 2017

कैसे कोई जिये

वो  प्यार  के मौसम  सभी  जाने  कहाँ  गये तुम  दर्द   बन  के  मेरे  दिल  में  समां  गये तुमने  भरी  दोपहर  में  आवाज़  दी  मुझे इतनी  कड़ी  थी  धूप, मेरे  पांव  जल  गये सीने  में  जमी  बर्फ़  जो  पिघली  ज़रा  ज़रा आँखों  में  रुके  थे   वो  आबशार  ढल  गये उड़ने  की  […]

July 2, 2017 · 0 comments · Poetry

Call

I hear a loud call from the brown hills and beyond That grey clouds That tower and cover the green of a land That sings a melody of diminution. I hear a shrill snivel from the river With its slim lyre sings With the memory of its flux With tide, […]

July 2, 2017 · 0 comments · Poetry