पुकार लो

कहा था मैने तुमसे

एक आवाज़ भर दे देना

चली आऊँगी मैं

तोड़ कर सब बाधायें

नदी की धारा के विरुद्ध

तैरना पड़े तो

तैरूंगी  मैं ,

पार करूँगी पर्वत

जो आड़े आये तो

मगर नहीं रुकूँगी मैं

तुम्हारी इक पुकार पर

चली आऊँगी मैं

है  याद तुमको

कहा था मैंने ,

पर तुमने तो कोई भी

आवाज़ नहीं दी

इंतज़ार और

उम्मीदों को थोड़ी सी भी

परवाज़ नहीं दी

आज उदासी का मेरी

यही राज़ है हमदम

क़तरा क़तरा मरने का

आगाज़ है जानम

अब तो कोई वजह भी

नहीं रही कि आऊँ

अश्क़ों में भीगी भागी

मुस्कान दिखाऊँ

तुम तो क्या ,

ये मौत भी

जब तक नहीं बुलायेगी

नहीं जाऊंगी मैं

सिर्फ एक आवाज़ भर देना

मुझे तुम

नंगे  पाँव

चली  आऊंगी मैं

सुधा

Just Call Me

I have told you

Just call me

And I will come

Breaking the barriers,

If needed to swim

Against the current,

I will swim

I’ll cross  mountains

Which may

Block me,

But will not stop me

At one call from you

I will come

Do you remember that ?

I had told you,

But,

You never called

All my wait

And expectations

You stalled

That is the

Secret of my suffering, comrade

Beginning of my slow death, mate

Now, there is no reason

For me to come

No reason to show

My tearful smile, chum

It’s not only you,

Even Death

Does not call me

I won’t go

So, just once

If you call me,

Bare foot,

I will come

                                                ~Sudha Dixit

                                                   Bangalore, India

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