हमारा देश

मेरे देश के वासियों
याद रखो ये देश ही हमारी माता है!
अपमान इनका करके जाऐंगे आप कहॉ?
लौटकर तो आना है ऑंचल मे ही इनके आपको
जाकर परदेश भूल जाते हो इस मॉं को
किया नही क्या-क्या जिन्होने आप के लिए
पड़ते हो संकट मे जब
आती है याद तब इनकी और
चिल्ला-चिल्ला के मॉंगते हो
अपनी सुरखशा की भीख तब
देती है वही मॉं सब कुछ बिना किए कोई सवाल
जिसके प्रति फैलाते रहे अब तक आप दुर्विचार
होती अगर देर मदद् देनेे मे
चीख-चीख कर बोलते हो
हैं तो भारतीय हम लेकिन
करता नही सहायता भारत हमारी।
प्रिए देश वासियो, है ये कैसा अंधेर
लेना तो जानते हो पर देना नही!
देते हो गालियॉं देश को अपने होते हो जब सुरखशित
खो जाती है कहॉं तब ये भावना देश प्रेम की तुम्हारी?
बात आश्चर्य जनक तो ये है
बन न सके देश के, रहकर सालो यहॉं
पर देश द्रोही निश्चित हैं अनेक यहॉं
लगाते हैं न केवल नारे उसके खिलाफ़
पर खाते हैं कसम नष्ट करने की उसे
दुःख और चिंता जनक बात तो है ये कि
मिलता है सहयोग-समर्थन इन्हें कुछ स्वार्थियो का
देश द्रोहियों से मिलाते हैं हाथ
करने हैरान और भड़काने सरकार के खिलाफ़
करती हुँ प्रार्थना आप सभी से
चढ़ाओ न बलि अपनी माता की
मिलकर सिखलाओ सबक इन देश द्रोहियों को
दिखा दो चलेगा नहीं ये सब देश मे हमारे.
बदला अपनी पराजित का ले रहे हो अपने देश से क्यो?
खुद से लो और निकलो उस दल-दल से धस रहे हो जिसमेंं तुम
तान कर सीना लड़ो उनसे, बरबादी देश की, उद्देश्य है जिनका
बनाओ मत इन देश-द्रोहियो को अपनी खुदगर्ज़ की ढाल
दो न पनाह न सहमत उन्हे
जुटे हैं देश के विनाश मे जो
भूलिए मत-
जो रहकर सालो यहॉं हो न सका देश का
बनेगा वह तो अस्तीन का सॉंप ही
छोड़ेगा नहीं डसेगा एक दिन आप को भी जरूर
करोगे क्या फिर हुज़ूर?
बनकर गुलाम पसन्द करेंगो रहना क्या?
गड़बड़ है जो इस देश में आज
है जिम्मेदार उसका कौन?
रखो हॉंथ छाती पर अपनी करके ऑंखे बंद
टटोलो मन को अपने
उत्तर सही मिलेगा आपको अवश्य
बरबादी सालो की सुधर सकती नहीं चंद दिनो में
रखो धीरज करने दो काम अपना सरकार को
सालो लिए आपने और
अब करते हो अपेखशा चमतकारों की चंद ही समय में!
क्यों भाई, क्यों?
ये तो घोर अन्नयाय है
रखो शांती व धीरज ठीक उसी तरह
जैसे इस देश ने रखी आपके प्रति!
जय हिंद

     Our Country

All my country men remember

This country is our Mother.

Humiliating her will take you nowhere

To her you will return for sure

When abroad you go you forget

This Mother who nursed & cherished you,

But insecurity revives her memory

For help and support you then plead with her

Without a second thought this same Mother whom

You berated and chided-gives you!

You shout out loud and clear if help be delayed that

An Indian though you are, India cares not for you

My dear countrymen, how very illogical it is

You want the harvest without sowing anything good!

Abuse and criticism is what you reward your country with

Where in the maze of secured life your patriotism gets lost?

It’s shocking, living here for years true citizens many couldn’t become but

Traitors here you definitely find in ample

Shouting against the country not only slogans but

Vowing to destroy it completely!

How very distressing it is to see them being

Supported and protected by some for selfish motives

Harassing and instigating the populace being their sole aim!

I implore to all of you

Sacrifice not your Mother at the altar of selfishness

Let’s unite and teach them a lesson

Our country will stand no nonsense

Avenge not the country for your defeat

Pull yourself out of the sinking sands you are drowning in

Boldly confront them whose target of destruction our country is!

Make them not your armour of selfishness.

Forget not if a true patriot they couldn’t become

A serpent they transform into

It won’t spare you either!

What will you do then, Sir?

Will you like to become his slave?

Who is responsible for the problems in our country today?

Close your eyes, place your hand on your chest and think honestly

An answer definitely you will get

Massive accumulated problems can’t in a matter of few days be overcome

Years you took for the same so

Why do you now expect miracles overnight?

 Great injustice, isn’t it?

Be peaceful and patient

Just as this country has been with you!

Jai Hind!

                                                     ~Anuradha. S. Bannore

                                                      Vadodara, Gujarat

 

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